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    Home»राज्य»छत्तीसगढ़»मुख्यमंत्री की पर्यावरण संतुलन और आर्थिक संवर्धन से जिले में जल संरक्षण की बहुआयामी पहल:-महेन्द्र सिंह मरपच्ची
    छत्तीसगढ़

    मुख्यमंत्री की पर्यावरण संतुलन और आर्थिक संवर्धन से जिले में जल संरक्षण की बहुआयामी पहल:-महेन्द्र सिंह मरपच्ची

    News DeskBy News DeskMarch 22, 2025No Comments6 Mins Read
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    विश्व जल दिवस पर विशेष लेख

    एमसीबी/मनेंद्रगढ़
     जल केवल एक संसाधन नहीं, बल्कि संपूर्ण जीवन और सभ्यता की धुरी है। मनुष्य के अस्तित्व से लेकर कृषि, उद्योग और पर्यावरण तक जल की अनिवार्यता स्पष्ट है। लेकिन आज जल संकट एक वैश्विक चुनौती बन चुका है, जिससे भारत भी अछूता नहीं है। प्रत्येक वर्ष 22 मार्च को विश्व जल दिवस मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य जल संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाना और सतत जल प्रबंधन की दिशा में प्रयासों को तेज करना है। भारत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में जल संरक्षण और स्वच्छ जल आपूर्ति के लिए कई महत्वपूर्ण योजनाएं चलाई जा रही हैं, जिनका प्रभाव पूरे देश और छत्तीसगढ़ राज्य में स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है।

    जल जीवन मिशन के तहत हर घर तक स्वच्छ जल पहुंचाने की हुई प्रतिबद्धता

            प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में जल जीवन मिशन के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में हर घर नल से जल पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। जिसमें छत्तीसगढ़ की मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के मार्गदर्शन में इस मिशन को और अधिक प्रभावी बनाया गया है । मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले में जल जीवन मिशन की प्रगति को देखें तो अबतक कुल 60,379 नल कनेक्शन पूर्ण किया किया गया है । जबकि जिले की 19 गांवों को शत-प्रतिशत नल कनेक्शन से जोड़ा गया है, जिससे वहां के लोगों को अब स्वच्छ पेयजल की सुविधा सुनिश्चित हो चुकी है। कई गांवों में सौर ऊर्जा आधारित जल आपूर्ति प्रणाली लागू की गई है, जिससे जल आपूर्ति निरंतर बनी रहे। छत्तीसगढ़ में जल संरक्षण की चुनौतियां और उसके संभावनाएं छत्तीसगढ़ जल संसाधनों की दृष्टि से समृद्ध राज्य है। यहां महानदी, हसदेव, शिवनाथ, इंद्रावती, अरपा और खारून जैसी प्रमुख नदियां हैं, जो कृषि, उद्योग और पेयजल कबआपूर्ति के लिए जीवनरेखा का काम करती हैं। लेकिन अनियंत्रित जल दोहन, शहरीकरण और जलवायु परिवर्तन के कारण राज्य के कई क्षेत्रों में जल संकट गहराता जा रहा है। भूजल स्तर लगातार गिरता जा रहा है, जिससे कई जिलों में पानी की कमी देखी जा जाती है। मानसून में अनिश्चितता के कारण कुछ इलाके बाढ़ग्रस्त हो जाते हैं, जबकि अन्य हिस्से सूखे की चपेट में आ जाते हैं। ऐसे में जल संरक्षण की दिशा में ठोस कदम उठाना भी जरूरी हो गया है।

    प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के नेतृत्व में जल संरक्षण के लिए किया जा रहा सशक्त प्रयास

              केन्द्र सरकार और छत्तीसगढ़ सरकार ने जल संरक्षण और प्रबंधन के लिए कई योजनाएं चलाई हैं। इनमें  "कैच द रेन" अभियान के तहत गांवों और शहरों में जल स्रोतों के पुनर्जीवन, वर्षा जल संचयन और जल उपयोग की दक्षता बढ़ाने पर ध्यान दिया गया है। इस अभियान के तहत ग्रामीण इलाकों में पुराने कुओं, तालाबों और झीलों को पुनर्जीवित किया जा रहा है, जिससे जल पुनर्भरण की प्रक्रिया को गति मिले। "अटल भूजल योजना"  विशेष रूप से भूजल स्तर को सुधारने के लिए बनाई गई है, जिसमें समुदाय-आधारित जल प्रबंधन को बढ़ावा दिया जा रहा है। छत्तीसगढ़ के कई जिलों में इस योजना के तहत बोरवेल रिचार्जिंग, जल पुनर्भरण संरचनाओं और जल उपयोग दक्षता बढ़ाने के प्रयास किए गए हैं। वहीं "अमृत सरोवर मिशन"  के तहत मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले में अबतक 96 अमृत सरोवरों का निर्माण पूर्ण हो चुका है। ये सरोवर जल संरक्षण को बढ़ावा देने, भूजल स्तर में सुधार लाने, और कृषि एवं आजीविका के साधनों को सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। इसके अलावा ये सरोवर सामुदायिक गतिविधियों और पर्यावरणीय संतुलन को भी प्रोत्साहित करते हैं। छत्तीसगढ़ के विभिन्न अमृत सरोवर स्थलों पर संविधान दिवस जैसे महत्वपूर्ण आयोजनों का आयोजन किया जाता है, जिससे सामुदायिक सहभागिता और जागरूकता में वृद्धि होती है। इन सरोवरों के निर्माण से स्थानीय निवासियों को सिंचाई, मछली पालन और अन्य आर्थिक गतिविधियों के अवसर मिलते हैं, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार होता है। इसके अलावा "प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना" के अंतर्गत किसानों को माइक्रो इरिगेशन (ड्रिप और स्प्रिंकलर सिस्टम) अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है, जिससे कम पानी में अधिक सिंचाई संभव हो सके। इससे जल की बर्बादी कम होती है और खेती को और अधिक टिकाऊ बनाया जा सकता है। "अमृत योजना" के माध्यम से शहरी क्षेत्रों में जलापूर्ति और सीवरेज प्रबंधन को बेहतर बनाने के लिए कार्य किए जा रहे हैं, जिससे शहरी जल संकट को दूर करने में मदद मिल रही है।

    जल संरक्षण के लिए हर व्यक्ति की जनभागीदारी जरूरी

          छत्तीसगढ़ और पूरे देश में जल संरक्षण को प्रभावी बनाने के लिए कुछ महत्वपूर्ण कदम उठाने होंगे। वर्षा जल संचयन को बढ़ावा देकर भूजल स्तर को पुनः भरना आवश्यक है। स्मार्ट जल प्रबंधन तकनीकों जैसे कि डिजिटल वॉटर मीटरिंग और रियल-टाइम मॉनिटरिंग को लागू किया जाना चाहिए। औद्योगिक इकाइयों को जल पुनर्चक्रण अनिवार्य करना चाहिए, ताकि जल अपव्यय को कम किया जा सके। गांवों में पारंपरिक जल संरचनाओं जैसे तालाबों, बावड़ियों और कुओं का पुनर्निर्माण कर उन्हें जल पुनर्भरण के लिए उपयोग किया जाना चाहिए। कृषि में पानी की बचत के लिए सूक्ष्म सिंचाई (ड्रिप और स्प्रिंकलर) को बढ़ावा देना होगा। स्कूलों और कॉलेजों में जल संरक्षण की शिक्षा देकर युवाओं के साथ साथ हर व्यक्ति को भी जल बचाने के लिए प्रेरित किया जाना चाहिए।

    विश्व जल दिवस के दिन जल संरक्षण का संकल्प लेने का सही समय

           विश्व जल दिवस केवल एक प्रतीकात्मक अवसर नहीं, बल्कि जल संरक्षण के प्रति प्रतिबद्धता जताने और ठोस कार्रवाई करने का अवसर है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में जल संरक्षण के लिए कई प्रभावी योजनाएं लागू की गई हैं, जिनका लाभ पूरे देश और छत्तीसगढ़ को मिल रहा है। लेकिन केवल सरकार के प्रयास ही पर्याप्त नहीं हैं। हर नागरिक को जल बचाने की दिशा में योगदान देना होगा। यदि हम आज जल संरक्षण के प्रति गंभीर नहीं हुए, तो भविष्य में यह संकट और विकराल रूप ले सकता है। हमें आज ही जल संरक्षण के ठोस उपाय अपनाने होंगे, ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक सुरक्षित और समृद्ध जल भविष्य सुनिश्चित किया जा सके। जल संरक्षण केवल एक जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के प्रति हमारा कर्तव्य है। इस विश्व जल दिवस पर हमें यह संकल्प लेना चाहिए कि हम हर बूंद बूंद जल को बचाएंगे, जल स्रोतों का सम्मान करेंगे और जल का विवेकपूर्ण उपयोग करेंगे ।

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