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    Home»राज्य»मध्यप्रदेश»भारतीय ज्ञान परम्परा के विभिन्न आयामों पर शोध में शासन के साथ समाज को भी योगदान देना होगा : मुख्यमंत्री डॉ. यादव
    मध्यप्रदेश

    भारतीय ज्ञान परम्परा के विभिन्न आयामों पर शोध में शासन के साथ समाज को भी योगदान देना होगा : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    News DeskBy News DeskFebruary 3, 2025No Comments6 Mins Read
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    भोपाल : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि ऋषि स्वरूप व्यक्तित्व के दत्तोपंत ठेंगड़ी ने दीपक के समान स्वयं जलकर विचारों का प्रकाश समाज को प्रदान किया। कृषि, श्रमिकों की स्थिति और स्वदेशी के क्षेत्र में उनका विचार उज्जवल नक्षत्र के समान हैं, जो समाज को निरंतर मार्गदर्शन प्रदान करते रहेंगे। विद्यार्थी परिषद के संस्थापक सदस्य के रूप में भी उनकी भूमिका महत्वपूर्ण रही। वे हिंदुत्व को राष्ट्रीयता से आगे विश्व बंधुत्व के रूप में देखते थे। उनका मानना था कि चराचर जगत में हिंदुत्व के विचार का विस्तार मनुष्य, समाज, राष्ट्र और मानवता तक है। वर्तमान समय में उनके विचार अधिक समसामयिक हो जाते हैं, सम्पूर्ण विश्व विभिन्न समस्याओं में मार्गदर्शन और उनके समाधान के लिए भारत की ओर आशा की दृष्टि से देख रहा है। भारत अपनी यह भूमिका प्राचीन भारतीय ज्ञान परम्परा के आधार पर ही निभा सकता है। इस परिप्रेक्ष्य में भारतीय ज्ञान परम्परा के विभिन्न आयामों पर शोध की आवश्यकता अधिक बढ़ जाती है, शोध के क्षेत्र में शासन के साथ-साथ समाज को भी योगदान देना होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव दत्तोपंत ठेंगड़ी शोध संस्थान के नवीन परिसर भवन के भूमि-पूजन और कार्य आरंभ के अवसर पर संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम में विचारक एवं लेखक सुरेश सोनी सारस्वत अतिथि के रूप में उपस्थित थे।

    शोध संस्थान की वार्षिक स्मारिका 'संकेत रेखा' का हुआ विमोचन

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव बसंतोत्सव के अवसर पर लिंक रोड नंबर तीन पर आयोजित कार्यक्रम में बाबा महाकाल के चित्र पर माल्यार्पण कर भूमि-पूजन एवं कार्य आरंभ में मुख्य अतिथि के रूप में सम्मिलित हुए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भूमि-पूजन स्थल पर पौधा भी रोपा। उन्होंने मंचीय कार्यक्रम में दीप प्रज्ज्वलित कर मां सरस्वती तथा श्रद्धेय दत्तोपंत ठेंगडी जी के चित्र पर मार्ल्यापण कर पुष्पांजलि अर्पित की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दत्तोपंत ठेंगड़ी शोध संस्थान की वार्षिक स्मारिका 'संकेत रेखा' का विमोचन किया। इसके साथ ही संस्थान द्वारा दिनांक 01 से 03 मार्च 2025 तक आयोजित नेशनल रिसर्चर्स मीट के पोस्टर का भी विमोचन किया।

    ज्ञान की ऊर्जा और सामर्थ्य का उपयोग समाज हित में करना जरूरी

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि ऐतिहासिक रूप से भारत में विद्यमान गुरूकुल और विश्वविद्यालय भारतीय समाज के ज्ञान सामर्थ्य को अभिव्यक्त करते हैं। जीवन के प्रत्येक पल का उपयोग व्यक्ति समाज हित में कर पाए, यही भारतीय संस्कृति के अनुसार, जीते जी मोक्ष प्राप्ति की भावना है। भारतीय विचार, व्यक्ति को संघर्ष के स्थान पर प्रेम और बंधुत्व के लिए प्रेरित करते हैं। जनजातीय समाज सहित भारतीयता के विभिन्न पहलुओं पर समग्रता में शोध के लिए दत्तोपंत ठेंगड़ी शोध संस्थान जैसी पहल की अत्यधिक आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में लागू नई शिक्षा नीति पुस्तकीय ज्ञान के स्थान पर व्यवहारिक अनुभूति को अधिक महत्व देती है। इसका उपयोग करते हुए मानवता के हित और लाभ सुनिश्चित करने वाले शोध की ओर अग्रसर होना होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि बसंत पंचमी के अवसर पर ज्ञान की देवी माँ सरस्वती के पूजन के साथ हुआ दत्तोपंत ठेंगड़ी शोध संस्थान का भूमि-पूजन ज्ञान की ऊर्जा और सामर्थ्य का उपयोग समाज हित में करने का मार्ग प्रशस्त करेगा।

    उत्पादन में प्रचुरता, वितरण में समानता और उपभोग में संयम के त्रिसूत्र पर चलना होगा

    विचारक एवं लेखक सुरेश सोनी ने कहा कि दत्तोपंत ठेंगड़ी जी भारतीय ऋषि प्रज्ञा की अभिव्यक्ति थे। जीवन के सभी क्षेत्रों में भारतीय दर्शन को केन्द्र में रखना उनकी विशेषता थी। व्यक्तिगत जीवन से लेकर विश्व शांति के विषय उनके विचारों की परिधि में थे। विस्मरण और सही जानकारियां न होना भारतीय अकादमिक जगत की समस्या है। मैकाले की शिक्षा नीति का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि आत्मकेन्द्रितता, भोगवाद जैसे जीवन मूल्यों के स्थान पर त्याग, संयम, समर्पण जैसे भारतीय जीवन मूल्यों की स्थापना और भारतीय दृष्टिकोण को विकसित करना भारतीयता को समझने के लिए आवश्यक है। उन्होंने कहा कि शिक्षा, संस्कृति और शोध को भारत केन्द्रित करने की दिशा में समग्र प्रयास करने की आवश्यकता है। पंडित दीनदयाल उपाध्याय के विचारों के अनुसार उत्पादन में प्रचुरता, वितरण में समानता और उपभोग में संयम के त्रिसूत्र के आधार पर समाज और राष्ट्र का निर्माण करना होगा। इस उद्देश्य से शोध को दिशा देने की आवश्यकता है।

    मध्यप्रदेश बनेगा मौलिक शोध का प्रमुख केंद्र

    लेखक सोनी ने कहा कि प्रकृति में जितना महत्व मनुष्य का है, उतना ही जीव जगत, वनस्पति, पर्वत और जल संरचनाओं आदि का भी है। यह भी ध्यान रखना आवश्यक है कि जो जितना विवेकशील है, प्रकृति के संधारण और सभी के हितों के संरक्षण में उसका दायित्व भी उतना अधिक है। इस दृष्टि से प्रकृति के संतुलन को बनाए रखने में मनुष्य का दायित्व बहुत अधिक बढ़ जाता है, यही भारतीय दृष्टि से देखने की प्रक्रिया है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि दत्तोपंत ठेंगड़ी शोध संस्थान इस भारतीय मूल दृष्टि से बहु आयामी शोध गतिविधियों का विस्तार करेगा और मध्यप्रदेश, सम्पूर्ण देश में मौलिक शोध का प्रमुख केन्द्र बनेगा। उन्होंने इस उद्देश्य प्राप्ति में सभी से सहयोग का आव्हान किया।

    ठेंगड़ी ने भारत केन्द्रित विचार क्रांति का प्रवाह किया

    उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने कहा कि ठेंगड़ी ने भारत केन्द्रित विचार क्रांति का प्रवाह किया। उनके किसानों, श्रमिकों के साथ ही शिक्षा के क्षेत्र में किए गए योगदान का भारतीय ज्ञान परम्परा को समृद्ध करने में विशेष योगदान रहा है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव के मार्गदर्शन में प्रदेश की शोध संस्थाएं भारतीय परम्पराओं में निहित वैज्ञानिक दृष्टिकोण को सामने लाने में सहायक होंगी। शोध के क्षेत्र में हो रहे नवाचारों से नए आयाम स्थापित होंगे तथा प्रदेश में शोध का बेहतर वातावरण भी निर्मित होगा। संस्कृति, पर्यटन, धार्मिक न्यास और धर्मस्व राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) धर्मेन्द्र सिंह लोधी ने कहा कि श्रद्धेय ठेंगड़ी जी राष्ट्रभक्ति और आधुनिकता का अनूठा संगम थे। वे देश का विकास भारतीय सनातन ज्ञान और शिक्षा के आधार पर करना चाहते थे। उनको समर्पित शोध संस्थान भारतीय ज्ञान परम्परा के विविध पक्षों को समाज के सामने लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। दत्तोपंत ठेंगड़ी संस्थान के अध्यक्ष अशोक पांडे ने कहा कि ठेंगड़ी का व्यक्तित्व राष्ट्र धारा में परिष्कृत और परिमार्जित था। वे अपने विचारों से अंधकार पर प्रकाश, विपन्नता पर समृद्धि और अज्ञानता पर ज्ञान की विजय के लिए समाज को निरंतर प्रेरित करते रहे। कार्यक्रम में विभिन्न विश्वविद्यालयों तथा अकादमिक संस्थाओं के पदाधिकारी, विषय-विशेषज्ञ तथा शोधार्थी शामिल हुए।

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