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    Home»राज्य»मध्यप्रदेश»अब ग्वालियर भी बनेगा डायमंड सिटी
    मध्यप्रदेश

    अब ग्वालियर भी बनेगा डायमंड सिटी

    News DeskBy News DeskFebruary 3, 2025No Comments4 Mins Read
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    ग्वालियर । पन्ना के बाद अब मप्र के एक और शहर में अतुल खजाना मिलने के संकेत मिले हैं। सर्वे ऑफ इंडिया की टीम जल्द ही इस शहर में माइनिंग शुरू करेगी। मप्र में पन्ना के बाद अब ग्वालियर की धरती से हीरा निकलेगा। दरअसल, अब ग्वालियर की धरती में भी हीरा मिलने के संकेत मिले हैं। इसके लिए ग्वालियर के घाटीगांव ब्लॉक व भितरवार ब्लॉक में हीरा खनन के लिए जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया सर्वे करने की तैयारी में है। इसके लिए राजस्व व वन विभाग की भूमि की चिह्नित की जा रही है। सर्वे ऑफ इंडिया हीरे की तलाश करेगी। ग्वालियर की पहचान पत्थर निर्यात के लिए है। यदि हीरा मिल जाता है तो पन्ना की तरह ग्वालियर को भी हीरे के लिए पहचाना जाएगा।
    दरअसल मप्र के पन्ना क्षेत्र में हीरा पाया जाता है। पन्ना हीरा की पहचान भी हीरे के लिए है। यह विंध्य ग्रुप का हिस्सा है। ग्वालियर भी विंध्य ग्रुप के अंतर्गत आता है। सेटेलाइट सर्वे में ग्वालियर क्षेत्र में हीरा होने के संकेत आए हैं। इसके लिए चीनौर व मोहना क्षेत्र को चुना गया है। इस क्षेत्र में राजस्व व वन विभाग की भूमि आती है। सर्वे कर हीरा खनन की जगह चिह्नित की जाएगी। कांच बनाने कच्चे माल का खनन सिमिरिया टांका में डबरा के सिमिरिया टांका में कांच बनाने के कच्चे माल का खनन किया जाएगा। खनिज विभाग ने 4 हैक्टेयर में खनन की लीज दी है। 64 रुपए प्रति टन की बोली निर्धारित की थी, लेकिन 3 हजार 868 रुपए प्रति टन के हिसाब से लीज दी गई है। लीज की बोली कई गुना ऊपर गई है। सिमिरिया टांका से कच्चा माल खनन कर कांच बनाने के लिए फैक्ट्री को आपूर्ति की जाएगी। कांच सिलीकॉन डाइऑक्साइड से तैयार किया जाता है। कांच बनाने का कच्चा माल बुंदेलखंड ग्रुप में पाया जाता है। ग्वालियर का कुछ हिस्सा बुंदेलखंड ग्रुप में आता है।

    35 गांव चिह्नित
    ग्वालियर में हीरा की खोज के लिए 35 गांव चिह्नित किए हैं। ग्वालियर और शिवपुरी जिले के इन गांवों में पहाड़ और मिट्टी पन्ना जिले जैसी है। इस कारण हीरा होने की संभावना ज्यादा है। जिले के 421 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में डायमंड ब्लॉक देने की तैयारी है। इसे नरवर डायमंड ब्लॉक का नाम दिया गया है। जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (जीएसआई) ने राजस्व, वन और आरक्षित वन भूमि की जानकारी मांगी है। इस जानकारी के पहुंचने के बाद हीरे के खनन के लिए खदान आवंटित की जाएगी। दरअसल, पन्ना में हीरा पाया जाता है। यह विंध्य ग्रुप का हिस्सा है। ग्वालियर भी विध्य ग्रुप के तहत आता है। मिट्टी और पहाड़ों की एक जैसी स्थिति को देखते हुए जीएसआई ने सर्वे किया था। इसमें ग्वालियर और शिवपुरी में हीरा मिलने की संभावना नजर आई है। हीरा मिलने पर ग्वालियर की पहचान भी पन्ना की तरह होगी। रोजगार के नए अवसर भी खुलेंगे। घाटीगांव ब्लॉक में करई, दुर्गसी, बन्हेरी, सेकरा, चुही, बराहना, पटपरी, उम्मेदगढ़, ओबरा, पाटई, मानपुरा, कलवाह, सेमरी, चनगोरा, डागोर, तघई, बडक़ागांव, मोहना, आदि गांव में खनन किया जाएगा। वहीं भितरवार ब्लॉक में भितरी, गधोटा, मावथा, हरसी, खोर, मुसाहरी, सेबई, जतरभी, रिछारी खुर्द, जखवार, बेलगड़ा, डोंगरपुर, मुधारी, रुअर, तालपुर वीरन, बमोर, रिछारी कला, हुरहुरी, रिठोदन, गाजना, श्याऊ, चिटोली, देवरी कला, कैथोड, धोबट, लोढी, करहिया, बैना गांव में खनन किया जाएगा। घाटीगांव क्षेत्र के अधिकतर गांव में 100 फीसदी क्षेत्र में खनन का ब्लॉक दिया जाएगा। भितरवार के लोढी में 2 फीसदी जगह पर ही खनन ब्लॉक मिलेगा। रिछारी कला में 1 फीसदी जगह पर ब्लॉक मिलेगा।

    सफेद और लाल पत्थर का खनन
     अभी ग्वालियर में सफेद और लाल पत्थर का खनन हो रहा है। इसके अलावा आयरन की भी खदान आवंटित है। पनिहार के पास नई खदान आवंटित करने की प्रक्रिया चल रही है। कांच की खदान डबरा में दी गई हैं। यहां से निकलने वाले खनिज से कांच तैयार किया जा रहा है। खनिज अधिकारी प्रदीप भूरिया का कहना है कि हीरा खनन के लिए ब्लॉक दिया जाना है। इसके लिए राजस्व, वन और संरक्षित वन की भूमि की जानकारी मांगी गई है। भूमि रिपोर्ट शासन को भेजी जा रही है।

    News Desk

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