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    मध्यप्रदेश

    योजनाओं को पूरा करने लिया जाएगा निजी निवेशकों  का सहारा

    News DeskBy News DeskFebruary 2, 2025No Comments4 Mins Read
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    भोपाल। मप्र सरकार प्रदेश में समाज कल्याण से जुड़ी योजनाओं के लक्ष्य पूरे करने के लिए निजी निवेश लाने की तैयारी कर रही है। दरअसल, कई ऐसे बड़े गैर सरकारी संगठन (एनजीओ), सामजिक संगठन हैं, जो समाज कल्याण के क्षेत्र में निवेश करना चाहते हैं, लेकिन उन्हें इसके लिए कोई उचित प्लेटफॉर्म नहीं मिल पाता। उन्हें यह पता नहीं होता कि समाज कल्याण के क्षेत्र में वे कहां निवेश करें, ताकि उनके पैसे का सही उपयोग हो। इसके लिए सरकार वित्तीय वर्ष 2025-26 के बजट में सोशल इम्पैक्ट बॉन्ड का नया कॉन्सेप्ट लेकर आएगी।वित्त विभाग के अधिकारियों का कहना है कि सोशल इम्पैक्ट बॉन्ड का उद्देश्य समाजिक क्षेत्रों, जैसे-सामाजिक न्याय विभाग, स्वास्थ्य, शिक्षा, महिला-बाल विकास विभाग आदि की चुनिंदा योजनाओं या कार्यक्रमों में निर्धारित लक्ष्य पूरा करने के लिए निजी निवेशकों (एनजीओ, सामाजिक संगठनों) को आमंत्रित करना है। सोशल इम्पैक्ट बॉन्ड के लिए सरकार बजट में करीब 20 करोड़ रुपए का प्रावधान कर रही है। बजट में सोशल इम्पैक्ट बॉन्ड का कॉन्सेप्ट लाने वाला मप्र देश का पहला राज्य है।  

    सरकार और संगठन के बीच होगा अनुबंध
    सरकार समाज कल्याण से जुड़ी अपनी किसी योजना विशेष के लक्ष्य तय करने के साथ ही इसकी समय सीमा फायनल करेगी। इसमें सरकार और एनजीओ, सामाजिक संगठन के बीच कॉन्ट्रैक्ट होगा। इस कॉन्ट्रैक्ट में योजना या कार्यक्रम का लक्ष्य, उसे पूरा करने की समय सीमा, निवेश की राशि, निवेशक को मिलने वाले रिटर्न आदि शर्तें शामिल रहेंगी। निवेशक निर्धारित समय सीमा में यदि लक्ष्य प्राप्त कर लेता है, तो सरकार उसे कॉन्ट्रैक्ट के अनुसार रिटर्न देगी, लेकिन यदि निवेशक लक्ष्य प्राप्त नहीं कर पाता है, तो उसे कोई रिटर्न नहीं दिया जाएगा। संबंधित निवेशक ने योजना में निर्धारित लक्ष्य पूरा किया है या नहीं, इसका ऑडिट थर्ड पार्टी करेगी। वित्त विभाग के अधिकारियों का कहना है कि कई ऐसे बड़े गैर सरकारी संगठन (एनजीओ), सामजिक संगठन हैं, जो समाज कल्याण के क्षेत्र में निवेश करना चाहते हैं, लेकिन उन्हें इसके लिए कोई उचित प्लेटफॉर्म नहीं मिल पाता। उन्हें यह पता नहीं होता कि समाज कल्याण के क्षेत्र में वे कहां निवेश करें, ताकि उनके पैसे का सही उपयोग हो। ऐसे निवेशकों के लिए मप्र सरकार सोशल इम्पैक्ट बॉन्ड के जरिए बेहतर प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराने की तैयारी कर रही है।  सरकार उन्हीं एनजीओ, समाजिक संगठनों के साथ कॉन्ट्रैक्ट करेगी, जो नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) के सोशल स्टॉक एक्सचेंज में रजिस्टर्ड होंगे। सोशल स्टॉक एक्सचेंज एक ऐसा प्लेटफॉर्म है, जहां सामाजिक उद्यम, संगठन जनता से धन जुटा सकते हैं। इक्विटी, कमोडिटीज, डेरिवेटिव्स और छोटे व मध्यम आकार के उद्यमों (एसएमई) की तरह सोशल स्टॉक एक्सचेंज पर एक सेगमेंट होगा। बीएसई और एनएसई दोनों को एसएसई चलाने की मंजूरी मिल गई है।

    शत-प्रतिशत लक्ष्य पूरा हो जाएगा
    सामाजिक क्षेत्र की कई योजनाओं या कार्यक्रमों को पूरा करने के लिए सरकार को पहले से निवेश नहीं करना पड़ेगा। सोशल इम्पैक्ट बॉन्ड के जरिए एनजीओ, समाजिक संगठन इसमें निवेश करेंगे। योजना का लक्ष्य पूरा होने के बाद ही सरकार को संबंधित निवेशक को राशि देना होगी। सरकार को सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि जिस मकसद से कोई योजना या कार्यक्रम तैयार किया गया है, उसका शत-प्रतिशत लक्ष्य पूरा हो जाएगा। उदाहरण के तौर पर यदि सरकार तय करती है कि एक निश्चित अवधि में निश्चित संख्या में लोगों की नशे की लत छुड़ाएंगे। जब कोई एनजीओ इस काम को हाथ में लेकर लक्ष्य पूरा करेगा, तभी उसे निश्चित रिटर्न मिलेगा। सोशल इम्पैक्ट बॉन्ड (एसआईबी) सार्वजनिक क्षेत्र या शासकीय प्राधिकरण के साथ एक अनुबंध है, जिसके तहत यह कुछ क्षेत्रों में बेहतर सामाजिक परिणामों के लिए भुगतान करता है और प्राप्त बचत का एक हिस्सा निवेशकों को देता है। सोशल इम्पैक्ट बॉन्ड वास्तव में एक बॉन्ड नहीं है, क्योंकि पुनर्भुगतान और निवेश पर वापसी (आरओआई) वांछित सामाजिक परिणामों की प्राप्ति पर निर्भर है। यदि उद्देश्य प्राप्त नहीं होते हैं, तो निवेशकों को न तो रिटर्न मिलता है और न ही मूलधन का पुनर्भुगतान होता है। एसआईबी का नाम इस तथ्य से लिया गया है कि इनके निवेशक आमतौर पर वे लोग होते हैं, जो न केवल अपने निवेश पर वित्तीय लाभ में रुचि रखते हैं, बल्कि इसके सामाजिक प्रभाव में भी रुचि रखते हैं। सोशल इम्पैक्ट बॉन्ड जोखिम भरे निवेश होते हैं, क्योंकि वे पूरी तरह से सामाजिक परिणाम की सफलता पर निर्भर होते हैं। पहला सोशल इम्पैक्ट बॉन्ड वर्ष 2010 में सोशल फायनेंस लिमिटेड द्वारा जारी किया गया था।

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