Tribal News: छत्‍तीसगढ़ में जागा आदिवासी स्वाभिमान, अधिकारों को लेकर हुए जागरुक…

A group of Indian tribes sit in open at a camp in Dornapal in the central state of Chhattisgarh, India March 8, 2006. More than 45,000 people have left their homes to live in camps run by the Salwa Judum, but have just bows and arrows to defend themselves against the rebels' guns and explosives. Picture taken March 8, 2006. REUTERS/Kamal Kishore

Tribal News: रायपुर (राज्य ब्यूरो)। छत्तीसगढ़ की पहचान आदिवासी राज्य के रूप में है, लेकिन अलग राज्य बनने के करीब 21 साल बाद भी उन्हें अपने अधिकारों की लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। इस बीच पिछले कुछ समय से वे अपने अधिकारों को लेकर ज्यादा सक्रिय नजर आ रहे हैं। अब तक उनकी आवाज घने वनों और पहाड़ों में सिमटकर रह जाती थी, लेकिन अब वे अपने अधिकारों के लिए राजधानी में राजभवन और मुख्यमंत्री निवास तक पहुंचने लगे हैं। आदिवासियों के विकास के लिए काम करने वाले उनमें आई इस जागृति को अच्छा संकेत मान रहे हैं।

इसी महीने बस्तर और सरगुजा संभाग के आदिवासियों ने राजधानी तक पदयात्रा करके अपनी ताकत का अहसास भी कराया है। अपने समाज के हितों की रक्षा के लिए काम कर रहे आदिवासी प्रतिनिधियों की राय में वनांचल में शिक्षा का स्तर बढ़ा है। लोगों में अपने अधिकारों को लेकर जागृति आई है। उन्हें पता चल गया है कि संविधान ने उन्हें और उनके क्षेत्र को विशेष अधिकार दिया है। यही वजह है कि अब वे अपने हक के लिए आवाज बुलंद करने लगे हैं।

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फैक्ट फाइल

 

32 फीसद है आबादी में हिस्सा

29 विधानसभा सीट है आरक्षित

03 लोकसभा सीट है आरक्षित

प्रदेश में आदिवासियों की सक्रियता का आंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पिछले महीने राज्य के अलग-अलग क्षेत्रों के आदिवासी प्रतिनिधि मुख्यमंत्री निवास पहुंचे थे। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने उनसे सीधा संवाद किया। सीएम हाउस में उनके लिए भोज का आयोजन भी किया गया था। इसी तरह राजभवन के दरवाजे भी उनके लिए खुले हुए हैं। राज्यपाल अनुसुईया उइके भी लगातार विभिन्न क्षेत्रों में आदिवासी प्रतिनिधिमंडलों से मिल रही हैं।

आदिवासी समाज में सामाजिक और राजनैतिक जनजागृति के लिए लंबे समय से सक्रिय सेवानिवृत्त आइएएस बीपीएस नेताम कहते हैं कि आदिवासी अपने जल-जंगल और जमीन की रक्षा के लिए पहले भी संवेदनशील रहते थे, लेकिन उनकी आवाज सुनी नहीं जाती थी। अब वे अपने अधिकारों को लेकर भी आवाज उठाने लगे हैं। पिछले कुछ समय से परिस्थितियां बदली हैं।
विधानसभा सीटों की स्थिति
संभाग कुल सामान्य एसटी एससी
बस्तर 12 01 11 00
सरगुजा 14 05 09 00
बिलासपुर 25 15 05 04
रायपुर 20 15 02 03
दुर्ग 19 15 02 03
कुल 90 51 29 10
चाहे मुख्यमंत्री निवास हो या राजभवन अब हमारी बातों को गंभीरता से सुना जा रहा है। यह अच्छी बात है। आदिवासियों के अधिकारों की रक्षा होनी चाहिए, आाखिर छत्तीसगढ़ का निर्माण ही आदिवासी राज्य के रूप में हुआ है। देश- दुनिया में इसकी पहचान भी यही है।

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