Story Of Jhiram Incident: राजनीतिक दल के लोगों पर सबसे बड़ा नक्सली हमला था छत्‍तीसगढ़ का झीरम कांड

Story Of Jhiram Incident

Story Of Jhiram Incident: रायपुर/जगदलपुर (राज्य ब्यूरो)। छत्तीसगढ़ के विधानसभा चुनाव 2013 में भाजपा को सत्ता से बाहर करने के लिए कांग्रेस ने परिवर्तन यात्रा निकाली थी। इस यात्रा पर बस्तर और सुकमा जिले की सीमा पर नक्सलियों ने हमला किया। यह हमला देश के इतिहास में किसी भी राजनीतिक दल के लोगों पर हुआ अब तक का सबसे बड़ा नक्सली हमला था। इस घटना को झीरम कांड के नाम से जाना जाता है।

25 मई 2013 को कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा के काफिले पर झीरम घाटी में नक्सलियों ने हमला कर प्रदेश कांग्रेस के अग्रिम पंक्ति के बड़े नेताओं को मौत की नींद सुला दिया था। इस घटना में कांग्रेस नेता, सुरक्षा बल के जवान और आम लोगों को मिलाकर 31 लोगों की शहादत हुई थी। इनमें तत्कालीन प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नंदकुमार पटेल, उनके पुत्र दिनेश पटेल, बस्तर टाइगर के नाम से चर्चित पूर्व मंत्री महेंद्र कर्मा, पूर्व विधायक उदय मुदलियार शामिल थे।

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घटना में बुरी तरह से घायल पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल कई दिनों तक जीवन मृत्यु के बीच संघर्ष करने के बाद अंत में जीवन की जंग हार गए। इस घटना को अंजाम देने के पीछे आखिर क्या वजह थी, यह आज भी पूरी तरह साफ नहीं हो पाई है। घटना की जांच केंद्र सरकार द्वारा एनआइए को सौपी गई थी।
भयावह हमले की यह थी कहानी
जगदलपुर से 42 किलोमीटर दूर दरभा के झीरम घाटी में 25 मई 2013 हुई इस नक्सली घटना की जानकारी शाम करीब चार बजे आई थी। यह खबर आग की तरह फैली कि माओवादी हमले में कई लोग मारे गए हैं, जिनमें बस्तर टाइगर के नाम से मशहूर महेन्द्र कर्मा और नंद कुमार पटेल भी शामिल हैं।
पूरे देश की नजर बस्तर पर टिक गई। सबसे पहले करीब साढ़े चार बजे कांग्रेसी राजीव नारंग और गोपी माधवानी को महारानी अस्पताल लाया गया था। यहां पर गोपी माधवानी ने दम तोड़ दिया था। समय के साथ लगातार एक के बाद एक कांग्रेसी और पुलिसकर्मियों को महारानी अस्पताल लाया गया।
रात करीब 10 बजे जब यह बात आई कि हमले में 31 लोग मारे गए हैं। मामले को लेकर जांच होती रही, एनआइए की टीम ने भी तफ्तीश की। अपनी रिपोर्ट सौंपी और इसके बाद झीरम मामले को लेकर न्यायिक जांच आयोग का गठन किया गया।
कांग्रेस सरकार आने के बाद दोबारा खुली फाइल
राज्य में कांग्रेस की सरकार आने के बाद इसकी जांच फाइल दोबारा खोली गई है। इस घटना में कुछ नक्सली लीडर के नाम सामने आए, जिनपर एनआइए ने भी नगद इनाम की घोषणा की है। लेकिन इनमें से कुछ को छोड़कर अधिकांश नक्सली पकड़ में नहीं आए हैं। नवंबर 2013 में राज्य में विधानसभा चुनाव होने थे।
आपसी अंतरकलह से उबरकर एकजुटता दिखाते हुए कांग्रेस राज्य में परिवर्तन यात्रा निकाल रही थी। सुकमा जिले में एक सभा के बाद सभी नेता सुरक्षा दस्ते के साथ काफिला लेकर अगले पड़ाव के लिए निकले थे। काफिले में सबसे आगे नंदकुमार पटेल, उनके बेटे दिनेश पटेल और कवासी लखमा सुरक्षा गार्ड्स के साथ आगे बढ़ रहे थे। पीछे की गाड़ी में मलकीत सिंह गैदू और महेंद्र कर्मा सहित अन्य नेता सवार थे। इस गाड़ी के पीछे बस्तर के तत्कालीन कांग्रेस प्रभारी उदय मुदलियार चल रहे थे।
झीरम घाटी में लगातार बरस रही थी गोलियां
दोपहर 3:50 मिनट पर काफिला घने जंगलों से घिरी झीरम घाटी पर पहुंचा। घाट में लगातार गोलियां बरस रही थी। कांग्रेसियों को नक्सलियों ने वी ट्रेप में घेरा रखा था। घाट का यह वह इलाका था, जहां पर रास्ता सामने जाकर सकरा हो जाता है और पीछे की चौड़ाई वाले इलाके में नक्सली ऊपर से गोली बरसा रहे थे।
सुरक्षा बल मौके पर पहुंचे तो दूर-दूर तक सिर्फ लाशें बिखरी पड़ी थीं। काफिले में सबसे आगे चल रही गाड़ी को नक्सलियों ने पहला निशाना बनाया। जब कांग्रेसी पूरी तरह घिर गए तो आगे से लेकर पीछे तक नक्सलियों ने हमला किया।

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