मां तो मां होती है! चाहे इंसान की हो या बिच्छू की, यकीन ना हो तो ये खबर पढ़ लें

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कोरबा: कहते हैं भगवान हर जगह नहीं पहुंच पाता इसलिए उन्होंने मां को बनाया. उसी मां की ममता के छांव में बच्चे बड़े होते है. मां की ममता वो नींव का पत्थर होती है, जिस पर बच्चों की भविष्य की इमारत खड़ी होती है. मां की ममता न केवल इंसानों में बल्कि जीवों में भी देखी जाती है. कोरबा में भी एक दुकान के बाहर ऐसे ही ममतामयी मां देखने को मिली. लेकिन वह इंसान नहीं एक मादा बिच्छू थी, जिसकी पीठ पर कई छोटे बिच्छू सवार थे.

दरअसल इसी नजारे को देखने के लिए उस दुकान के पास लोगों का मजमा जुट गया. लोग यह देखना चाहते थे कि मादा बिच्छू क्या करती है, कहां जाती है. लेकिन काफी देर के इंतजार के बाद भी बिच्छू अपनी जगह से नहीं हिली और उसके बच्चे उसकी पीठ पर हरकत करते रहे.

मां की ममता के आगे सभी हुए नतमस्तक
कोरबा के रिसदी इलाके में गोपाल राठौर की दुकान में रविवार को काली और काफी बड़ी मादा बिच्छू दिखी. दुकानदार गोपाल राठौर और आसपास के लोग बिच्छू को देखकर डर गए और उसे मारने ही जा रहे थे कि उनकी निगाह उस मादा बिच्छू की पीठ पर पड़ी. मादा बिच्छू की पीठ पर दर्जन भर से अधिक बिच्छू के बच्चे चिपके हुए थे. काफी देर तक उन्होंने उस बिच्छू पर निगाह रखी कि वह करती क्या है.

रेस्क्यू कर सुरक्षित जंगल मे छोड़ा गया
मादा बिच्छू को देखने के लिए जुटी भीड़ तरह-तरह की बयानबाजी करती रही. एक ने कहा कि यह जितनी काली और भयानक दिख रही है, उससे लगता है कि यह बेहद जहरीली होगी. किसी ने कहा कि चाहे जितनी भी जहरीली हो फिलहाल तो वह ममता से भरी हुई लग रही है. बस इसी बात पर वहां मौजूद लोगों का दिल पसीज गया और उन्होंने उस बिच्छू को न मारने का फैसला किया. इसके बाद उन्होंने स्नेक रेस्क्यू टीम के प्रमुख जितेंद्र सारथी को इसकी सूचना दी. जितेंद्र मौके पर पहुंचे और मादा बिच्छू के साथ बच्चों को बड़े आराम से रेस्क्यू कर डिब्बे में रख लिया और उन्हें सुरक्षित जंगल में छोड़ दिया.

प्राकृतिक क्रिया है बिच्छूओं का मादा की पीठ पर सवार रहना
बिच्छू एक ऐसा जीव है जो जन्म लेते ही माता को खा जाता है. जब तक वह अपनी माता को पूरी तरह नहीं खा लेता है. वह अपनी मां के ऊपर से नहीं हटता है. कहने का मतलब यह है कि बिच्छू अपनी मां के शरीर को खाकर बड़ा होता है, और बड़ा होने के बाद जब वह शरीर के सारे मांस को खा जाता है, तो वह दूसरी जगह चला जाता है. कोरबा में भी जो मादा बिच्छू से छोटे बच्चों का पीठ पर चिपका हुआ देखा गया. वह प्रकृति के नियमों का ही नजारा था.

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