Navratri 2021: श्रीयंत्र के दर्शन से मिलता है सौ यज्ञ का पुण्य

Navratri 2021: ज्योतिष पीठाधीश्वर एवं द्वारका शारदा पीठाधीश्वर के शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती द्वारा बोरियाकला में स्थापित शंकराचार्य आश्रम एवं त्रिपुर सुंदरी मंदिर परिसर में नवरात्र पर विशेष पूजा-अर्चना की जा रही है। पराम्बा भगवती राजराजेश्वरी त्रिपुर सुंदरी की उपासना श्रीयंत्र के साथ की जा रही है। आश्रम के ब्रह्मचारी डा. इंदुभवानंद महाराज ने बताया कि श्रीयंत्र त्रिपुर सुंदरी का आयतन माना जाता है।

श्रीयंत्र की रचना बिंदुओं से होती है, बिंदु से ही पिण्ड (शरीर) की रचना होती है और बिंदु से ही ब्रह्मांड की रचना होती है। बिंदु ही चक्र का मूल आधार है। श्री यंत्र शक्ति और शिव के अभेदयोग का प्रतीक है। शिव को संहारात्मक अग्नि तथा शक्ति को सर्गात्मक सोम का प्रतीक माना जाता है। इन दोनों से ही मिश्र बिंदु की उत्पत्ति होती है। यही मिश्र बिंदु श्रीयंत्र का आधार होता है।

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श्रीयंत्र के ज्ञान से पिंड और ब्रह्मांड दोनों का ज्ञान हो जाता है। श्रीयंत्र के दर्शन करने मात्र से सौ यज्ञ करने का पुण्य प्राप्त होता है। त्रिपुर सुंदरी की उपासना भोग और मोक्ष दोनों को देने वाली है। नवरात्रि एवं दीपावली में श्रीयंत्र की पूजा करने से अनेक जन्मों की दरिद्रता दूर हो जाती है।

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