Navratri 2021: दोपहर बाद शुरू होगा हवन, अष्टमी-नवमी की युति में रात्रि में पूर्णाहुति

Navratri 2021: गौरी का श्रृंगार करके पूजा की गई। मंदिरों में अष्टमी हवन के लिए वेदियां सजाई जा रही है। दोपहर बाद अष्टमी खत्म होने से पहले हवन शुरू होगा और रात में नवमीं तिथि शुरू होने पर यानी अष्टमी-नवमीं तिथि की युति बेला में पूर्णाहुति दी जाएगी। पुरानी बस्ती के महामाया मंदिर, शीतला मंदिर, सत्ती बाजार अंबा देवी मंदिर में बुधवार को अष्टमी-नवमी की युति में हवन किया जाएगा। शाम 7.30 बजे हवन पूजन शुरू होगा और रात्रि 9.30 बजे पूर्णाहुति दी जाएगी। आकाशवाणी काली मंदिर में दोपहर 4 बजे हवन शुरू होगा।

आज जोत का गुप्त विसर्जन

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हवन में पूर्णाहुति के बाद आरती की जाएगी। महामाया मंदिर में गुप्त रूप से जोत का विसर्जन आधी रात को मंदिर परिसर की बावली में ही किया जाएगा। अन्य मंदिरों की जोत-जंवारा का विसर्जन गुरुवार को नवमीं तिथि पर करेंगे। गुरुवार को सुबह मंदिरों में कन्या पूजन करके भोज प्रसादी का वितरण किया जाएगा।

कालीबाड़ी में महाभोग

बंगाली समाज के नेतृत्व में कालीबाड़ी स्थित मां महाकाली मंदिर में विशेष रूप से सजाए गए मंडप में माता काली, माता सरस्वती, माता दुर्गा और भगवान गणेश, कार्तिकेय की मनमोहक प्रतिमाओं का दर्शन करने भक्तों की कतार लगी रही। भीड़ से बचने के लिए महाभोग का प्रसाद कूपन बांटकर किया जाएगा।

श्रीयंत्र का दर्शन से मिलता है सौ यज्ञ का पुण्य

ज्योतिष पीठाधीश्वर एवं द्वारका शारदा पीठाधीश्वर के शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती द्वारा बोरियाकला में स्थापित शंकराचाार्य आश्रम एवं त्रिपुर सुंदरी मंदिर परिसर में नवरात्र पर विशेष पूजा-अर्चना की जा रही है। पराम्बा भगवती राजराजेश्वरी त्रिपुर सुंदरी की उपासना श्रीयंत्र के साथ की जा रही है। आश्रम के ब्रह्मचारी डा. इंदुभवानंद महाराज ने बताया कि श्रीयंत्र त्रिपुर सुंदरी का आयतन माना जाता है। श्रीयंत्र की रचना बिंदुओं से होती है, बिंदु से ही पिण्ड( शरीर) की रचना होती है और बिंदु से ही ब्रह्मांड की रचना होती है। बिंदु ही चक्र का मूल आधार है। श्री यंत्र शक्ति और शिव के अभेदयोग का प्रतीक है।

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