मिल्खा सिंह के निधन पर ‘ऑनस्क्रीन मिल्खा’ फरहान का ये ख़त भावुक कर देगा!

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महान एथलीट मिल्खा सिंह नहीं रहे. 18 जून की देर रात रात उन्होंने PGIMER चंडीगढ़ में अंतिम सांस ली. Covid-19 की चपेट में आने के 30 दिन बाद फ्लाइंग सिख ज़िंदगी की जंग हार गए. हालांकि वे कोविड से रिकवर कर चुके थे. कुछ दिन पहले ही उनकी कोविड-19 रिपोर्ट निगेटिव आई थी. इसके बाद उन्हें कोविड ICU वार्ड से मेडिकल ICU वार्ड में शिफ्ट किया गया. लेकिन वहां पर फिर से तबीयत खराब होने की वजह से शुक्रवार को उनका निधन हो गया. अभी 5 दिन पहले ही उनकी पत्नी निर्मल मिल्खा सिंह का कोविड-19 से निधन हो गया था.

उनके निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट किया –

“मिल्खा सिंह जी के जाने से हमने एक कद्दावर खिलाड़ी को खो दिया, जिन्होंने देशवासियों के दिल में अपनी अलग जगह बनाई थी. उनके प्रेरणादायी व्यक्तित्व ने करोड़ों लोगों को प्रभावित किया. उनके जाने से दुखी हूं. मेरी कुछ दिन पहले ही मिल्खा सिंह जी से बात हुई थी. क्या पता था कि ये उनसे आख़िरी बात होगी! उभरते एथलीट्स उनसे प्रेरणा ले सकेंगे. उनके परिवार और चाहने वालों के साथ मेरी संवेदनाएं.”

सचिन तेंडुलकर ने ट्वीट किया –

“रेस्ट इन पीस फ्लाइंग सिख मिल्खा सिंह जी. आपका जाना हर भारतीय के दिल में एक खाली जगह छोड़ गया है. लेकिन आप आने वाली कई पीढ़ियों को प्रेरणा देते रहेंगे.”

भारत की दिग्गज एथलीट रहीं PT उषा ने ट्वीट किया –

“मेरे आदर्श, मेरी प्रेरणा मिल्खा सिंह जी के निधन से बहुत दुखी हूं. उनकी प्रतिबद्धता और मेहनत की कहानियों से करोड़ों लोगों ने प्रेरणा ली है और आगे भी लेते रहेंगे. रेस्ट इन पीस.”

मिल्खा सिंह पर 2013 में बायोपिक बनी थी- ‘भाग मिल्खा भाग’. इसमें मिल्का का किरदार निभाने वाले अभिनेता फरहान अख़्तर ने उनके निधन पर एक भावुक ख़त लिखा है. इसमें फरहान ने लिखा –

“मेरे भीतर का एक हिस्सा अभी भी यकीन नहीं कर पा रहा है कि आप हमारे बीच नहीं हैं. शायद ये उसी ज़िद्दी स्वभाव की वजह से है, जो मुझे आपसे मिला, कि दिमाग ने जो एक बार सोच लिया, फिर उससे परे नहीं हटता. हार नहीं मानता.

और सच भी यही है कि आप हमेशा ज़िंदा रहेंगे. क्योंकि आप दिलदार, प्यारे और ज़मीन से जुड़े व्यक्ति थे. आप विचारों के प्रतिनिधि थे. आप इस बात के प्रतिनिधि थे कि किस तरह घुटनों के बल बैठा एक इंसान मेहनत और लगन के दम पर आसमान छू सकता है. आपने हम सब की ज़िंदगी को छुआ है. जो भी आपको एक पिता, एक दोस्त के तौर पर जान सका , वो भाग्यशाली है. आपके लिए दिल से मोहब्बत.”

मिल्खा की शख़्सियत कितनी बड़ी थी, उनका किरदार कितना मजबूत था, ये उन्होंने अपनी बायोग्राफी The Race of my life के आख़िरी चंद पन्नों से ज़ाहिर होता है. इसमें लिखा है –

“मिटा दे अपनी हस्ती को, अगर कुछ मर्तबा चाहे

कि दाना खाक में मिलकर गुले गुलज़ार होता है”

अलविदा मिल्खा!

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