Mahabharat : द्रौपदी ने पांचों पतियों के साथ इस नियम से निभाया पत्नी धर्म

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स्वयंवर में अर्जुन के जीतने के बाद मांता कुंती के आदेश पर द्रौपदी को पांचों भाइयों से विवाह करना पड़ा. लेकिन द्रौपदी कृष्ण की सलाह पर पांचों पतियों के साथ एक-एक साल का समय बिताती थीं.

Mahabharat : स्वयंवर में अर्जुन के जीतने के बाद मांता कुंती के आदेश पर द्रौपदी को पांचों भाइयों से विवाह करना पड़ा. लेकिन द्रौपदी कृष्ण की सलाह पर एक नियम के तहत उनके साथ पत्नी का धर्म निभाया. वह पांचों पतियों के साथ एक-एक साल का समय बिताती थीं. पांचों पतियों से उन्हें पांच पुत्र भी हुए, जो महाभारत के अंतिम दिनों में अश्वत्थामा के हाथों मारे गए. द्रौपदी के अलावा पांडवों में सर्वाधिक पत्नियां अर्जुन की रहीं तो बाकी भाइयों ने भी कम से कम एक और विवाह किया.

श्रीकृष्ण की सलाह पर पांडु पुत्रों के बीच एक समझौता हुआ, जिसके तहत द्रौपदी सब भाइयों के साथ 1-1 वर्ष समय बितांएगी. मगर इस बीच कोई दूसरा पाण्डुपुत्र वहां नहीं आ सकता था, ऐसा होने पर उसे एक वर्ष वनवास भोगना पड़ेगा. अर्जुन और द्रौपदी की एक वर्ष की अवधि अभी-अभी खत्म हुई थी और युधिष्ठिर के साथ नया वर्ष शुरू हुआ था, लेकिन अर्जुन भूलवश द्रौपदी के आवास पर ही गांडीव तीर भूल आए.

इस दौरान किसी दुष्ट से ब्राह्मण के पशुओं की रक्षा के लिए लिए उन्हें इसकी जरूरत पड़ी. अत: क्षत्रिय धर्म के पालन के लिए नियम तोड़ते हुए वह द्रौपदी के निवास में घुस गए, इस दौरान द्रौपदी-युधिष्ठिर साथ थे. इसके दंडस्वरूप अर्जुन को एक साल के लिए राज्य से बाहर जाना पड़ा. इस दौरान वन में रहने के कारण नागकन्या उलूपी उन पर मोहित हो गई और उन्हें वश में करके नाग लोक ले गई, जहां दोनों का विवाह हो गया. 

पांडवों की कुल पत्नियां
युधिष्ठिर : ‘द्रोपदी’ और ‘देविका’।
भीम : द्रौपदी, हिडिंब, बलंधरा।
अर्जुन : द्रौपदी, उलुपी, चित्रागंदा और सुभद्रा
नकुल : द्रौपदी, करेणुमती
सहदेव : द्रौपदी, विजया

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