‘कुछ लोग मरते हैं तो मरने दो, बसें जलती है तो जलने दो।’’ मैं दो-चार लोगों की कमीशन बनाकर कर भेजता हूं

रायपुर। दिल्ली देश की राजधानी है तो उत्तर प्रदेश देश की धार्मिक राजधानी है। यहां भगवान राम, कृष्ण मानव रुप में जन्म लिये और लीलाएं किये। साथ ही इसे भगवान शिव की नगरी भी कहा जाता है। उत्तर प्रदेश में अयोध्या, वाराणसी, सारनाथ, मथुरा, वृंदावन, चित्रकुट सहित कई धार्मिक शहर आते हैं। उत्तर प्रदेश में पिछले लंबे समय से जो हो रहा है। वह सही नहीं है। यूं कहें तो कोई गलत नहीं होगा। उत्तर प्रदेश जल रहा है।

एनसीआरबी 2020 की रिपोर्ट में एक नजर डालें तो हम पाते हैं कि उत्तर प्रदेश में बलवे के 5376 मामले दर्ज हुए हैं। बावजूद राज्य सरकार समय-समय पर लगातार दावें करती दिख जा रही है कि उत्तर प्रदेश में सब कुछ सहीं चल रहा है। और अगर मान भी लिया जाये कि उत्तर प्रदेश में सब कुछ सही चल रहा है तो हाथरस और लखीमपुर खीरी क्या है

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देश के तत्कालीन प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री जिस किसान के दर्द को दिल से महसूस किया करते थे। और ‘जय जवान, जय किसान’ का नारे दिये। आज उसी किसान को सत्तासीन सड़कों पर कुचल रहे हैं। उन किसानों को मौत के घाट उतारा जा रहा है। देश के ये किसान पिछले लंबे समय से सड़कों पर बैठे है। लेकिन ये सरकार है कि किसानों की मांगे नहीं मानती और उन्हें कुचलते रहती है। अभी तक लगभग 700 से अधिक किसान मारे जा चुके हैं। सरकार पर ये आरोप लगते रहे हैं कि अंबानी और अडानी को लाभ पहुंचाने की मंशा के चलते ही सरकार किसानों की मांगे नहीं मान रही है।

उत्तर प्रदेश का इतिहास कोई आज कल का नहीं है। यहां का इतिहास 4000 वर्ष पुराना है। इतिहास में मान्यता है कि हिन्दु सभ्यता का उद्भव भी यही हुआ है। हिन्दू नदी के किनारे ही हिन्दु सभ्यता का विकास हुआ है। जो उत्तर प्रदेश में स्थित है। जिसे आर्याव्रत, हिन्दुस्थान, भारत व इंडिया के नाम से पहचान मिली। आखिर इतनी पुरानी ऐतिहासिक सभ्यताओं से ओत-प्रोत उत्तर प्रदेश वर्तमान परिवेश में क्यों अपना अस्तित्व खोता जा रहा है। आखिर क्यों उत्तर प्रदेश अपने इतिहास के गौरव को संभाल नहीं पा रही है। कहने को तो यह सवाल बहुत विशाल है। लेकिन मात्र सवाल को विशाल कहकर जिम्मेदार अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकते हैं।

आखिर उत्तर प्रदेश में और कब तक हाथरस कांड और लखीमपुर खीरी जैसे मामले होते रहेंगे। जिसमें सरकार और सरकार पर बैठे हुए लोगों की भूमिका पर ही सवाल उठते रहते हैं। आखिर कब तक उत्तर प्रदेश की बेटियों के साथ अनाचार होता रहेगा। और इन बेटियों को जलाया जाएगा। लखीमपुर खीरी में जो हो रहा है क्या सरकार उसे सहीं मान रही है। क्या उत्तर प्रदेश में सब कुछ सही है। और अगर नहीं है तो केन्द्र मौन क्यों साधे बैठी है। उत्तर प्रदेश में किसकी सरकार है। योगी आदित्यनाथ की या फिर तानाशाह की। केन्द्र सरकार को उत्तर प्रदेश को लेकर गंभीरता दिखानी चाहिए। उत्तर प्रदेश के साथ-साथ केन्द्र सरकार पर भी सवाल उठ रहे हैं। जब पूरे देशवासियों की नजर लखीमपुर खीरी पर टिकी हुई है तो ऐसे में मोदी जी से एक शब्द भी घटना पर बोला नहीं जा रहा है। मोदी जी आखिर मौन साधकर किसे बचाना चाहते हैं। यह तो बड़ा प्रश्न है।

नायक फिल्म का वो सीन शायद सबको को याद ही होगा। जिस सीन में सीएम ‘अमरीश पुरी’ पुलिस कमिश्नर को फोन पर कहते हैं। अरे कमिश्नर ज्यादा उछल मत, ‘‘कुछ लोग मरते हैं तो मरने दो, बसें जलती है तो जलने दो।’’ मैं दो-चार लोगों की कमीशन बनाकर भेजता हूं, मामला रफा दफा कर देंगे। जिस तरह से फिल्म नायक में सीएम अमरीश पुरी ने पूरे प्रदेश को जलने दिया था। आज वहीं परिवेश उत्तर प्रदेश में है। यहां के योगी आदित्नाथ की सरकार ने उत्तर प्रदेश को जलने के लिए भट्ठी में झोंक दिया है।

आज सोशल मीडिया प्लेटफार्म ट्विटर में ‘भाजपा के आतंकवादी’ खूब ट्रेंड कर रहा है। अभी तक लगभग 1 लाख 43 से ज्यादा लोगों ने ‘भाजपा के आतंकवादी’ को ट्रेंड कराया है। जिसमें भाजपा को कातिल, हत्यारा व नायक फिल्म के पोस्ट के साथ शेयर किया जा रहा है। वहीं कुछ लोग टेररिस्ट ऑफ़ बीजेपी भी लिख रहे हैं।

लखीमपुर खीरी में हुए हत्याकांड के विरोध में पूरे देशभर में विरोध प्रदर्शन किया जा रहा है। लखीमपुर में प्रभावितों के परिवार वालों से मिलने निकली कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी को बिना वारंट गिरफ्तार करना, छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल व पंजाब के मुख्यमंत्री चरणजीत चन्नी को लखनऊ नहीं जाने देने से राज्य सरकार पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। सरकार किस बात से डर रही है। आखिर क्या है सरकार का डर ????

क्या है लखीमपुर खीरी कांड

रविवार को किसान कृषि बिल के विरोध में प्रदर्शन कर रहे थे। जहां उनसे मिलने केन्द्रीय मंत्री पहुंचे थे। उनके काफिले में उनका लड़का भी शामिल था। किसान इधर केन्द्रीय मंत्री से चर्चा कर ही रहे थे कि उनके बेटे ने किसानों पर अपनी थार गाड़ी चढ़ा दी। जिससे चार किसानों की मौत हो गई। इस पूरी घटना के बाद दोनों पक्षों में मामला गरमा गया। बाद में पूरी घटना में 8 लोगों की मौत की पुष्टि की गई। इस कांड में मृतकों के परिवारजनों को सरकार 45 लाख रुपये व घायलों को 10-10 लाख रुपये मुआवजा के रुप में देने जा रही है। साथ ही केन्द्रीय मंत्री के बेटे पर हत्या का केस दर्ज कर लिया है।

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