छत्तीसगढ़ में कल से नहीं चलेंगी बस, 5 लाख से ज्यादा यात्री होंगे प्रभावित

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रायपुर : छत्तीसगढ़ में बसों से यात्रा करने वालों को कल यानी 13 जुलाई से परेशानी हो सकती है। क्योंकि छत्तीसगढ़ यातायात महासंघ ने कल से बसों की हड़ताल की घोषणा की है। महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष अनवर अली बताया कि बीते कई दिनों से संघ की ओर से किराया बढ़ाने के लिए मांग की जा रही थी। दो सप्ताह से महासंघ के पदाधिकारी इस मुद्दे पर प्रशासन और सरकार के मंत्रियों से मुलाकात कर रहे थे। लेकिन सरकार इस पर राजी नहीं है। इसलिए मंगलवार से बसों का संचालन बंद करने का एलान किया है।

5 लाख यात्रियों को होगी मुश्किल, समझें इस बंद का असर से जुड़े फैक्ट

  • प्रदेश में कुल 12 हजार बसें, 9 हजार बस संचालक हैं।
  • 2500 बसें लोन की किश्त जमा न हो पाने की वजह से जब्त हैं।
  • आर्थिक तंगी की वजह से 300 बस संचालक इस काम को बंद कर चुके हैं।
  • हर रोज सिर्फ रायपुर से ही 5 लाख लोग प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में सफर करते हैं।
  • प्रदेश के कई हिस्सों में लोग काम-काज, बाजार, इलाज की वजह से बसों पर सफर करते हैं।
  • छत्तीसगढ़ में इस वक्त 1 लाख 8 हजार लोगों का रोजगार बस संचालन करने वाली एजेंसियों से जुड़ा है।
  • प्रदेश के आधे से अधिक जिले और हजारों गांव के लोगों को सिर्फ बस ही का सहारा है।
  • रायपुर, बिलासपुर, रायगढ़, अंबिकापुर, जांजगीर, भाटापारा, दुर्ग राजनांदगांव के लिए ट्रेन है, मगर इन जिलों के आस-पास बसें ही पहुंचती हैं।

इस वजह से बस संचालक अड़े अपनी जिद पर

2018 में 60 रुपए प्रति लीटर में बिकने वाला डीजल अब 2021 में लगभग 97 रुपए प्रति लीटर की दर पर बिक रहा है। छत्तीसगढ़ में यात्री किराया नहीं बढ़ने की वजह से बस संचालाकों को नुकसान हो रहा है। बीते दो सालों में लॉकडाउन और कोरोना के असर की वजह से आर्थिक परेशानी बढ़ी है। पड़ोसी राज्य जैसे मध्यप्रदेश में सरकार ने यात्री किराया बढ़ाने पर मंजूरी दी जिससे वहां के बस ऑपरेटरों को थोड़ी ही सही राहत मिली है।

बसें बंद करने के बाद जल समाधी की भी तैयारी

13 जुलाई को बस सेवा बंद करने के बाद 14 जुलाई को जल समाधी की तैयारी है। छत्तीसगढ़ यातायात महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष ने बताया कि हम सभी संचालाकों का परिवार आर्थिक परेशानी से जूझ रहे हैं। चूंकि हमारी मांगों पर सरकार ध्यान नहीं दे रही है। इसलिए में हम परिवार के साथ खारुन नदी में समधी ले लेंगे। 14 जुलाई को 3 बजे हम नदी के तट पर पहुंचेंगे अगर कोई अनहोनी होती है तो जिम्मेदार सरकार होगी।

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