छत्तीसगढ़ में फिर बढ़ी कोरोना पर सख्ती… रायपुर के इन क्षेत्रों में बनाया कंटेनमेंट जोन, आवाजाही प्रतिबंधित…

प्रदेश में कोरोना की संक्रमण दर काफी कम हो जाने के बाद भी रायपुर में बढ़ते मामलों को देखते हुए कंटेनमेंट जोन की वापसी हो गई है। रायपुर जिला प्रशासन ने रविवार को शहर के दो इलाकों को कंटेनमेंट जोन बनाया है। इसमें से एक डीडी नगर सेक्टर-1 और दूसरा कुकुरबेड़ा स्थित मेडीहेल्थ हास्पिटल है। दोनों इलाकों की बाड़ेबंदी शुरू हो गई है। प्रशासन ने इलाके में आवाजाही पर प्रतिबंध लगा दिया है।

एक ही परिवार में दो से ज्यादा लोग संक्रमित मिले
डीडी नगर सेक्टर-1 में एक ही परिवार में दो से अधिक लोग कोरोना पॉजिटिव मिले हैं। ऐसे में उनके घर से लेकर पश्चिम में अशोक तिवारी के मकान तक और उत्तर में योगेश यदु के घर से दक्षिण में एमपी स्वामी के मकान तक का इलाका कंटेनमेंट जोन बना दिया गया है। कुकुरबेड़ा के मेडीहेल्थ हॉस्पिटल में भी दो से अधिक मरीज मिलने पर उसे कंटेनमेंट जोन बनाया गया है। इस कंटेनमेंट जोन के पूर्व की तरफ एक निजी इमारत है। पश्चिम और उत्तर की तरफ सड़क है और दक्षिण दिशा में एक निजी इमारत को सीमा बनाया गया है।

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रायपुर कलेक्टर सौरभ कुमार ने कोरोना महामारी की रोकथाम के लिए किसी क्षेत्र में दो से अधिक एक्टिव कोविड-19 मरीज पाये जाने पर उसे माईक्रो कन्टेनमेंट जोन बनाने के निर्देश दिए थे। इसके लिए अपर कलेक्टर एनआर साहू को नोडल अधिकारी बनाया गया है। कोरोना की दूसरी लहर के विकराल होने के साथ ही कंटेनमेंट जोन की व्यवस्था खत्म हो गई थी।

व्यावसायिक गतिविधियां बंद
कंटेनमेंट जोन घोषित होते ही दोनों इलाकों में व्यावसायिक गतिविधियां पूरी तरह बंद कर दी गई हैं। इसमें आने-जाने के लिए केवल एक गेट होगा। इसके जरिए जरूरी सामान और स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन की टीम का आना-जाना हो सकेगा।

मेडिकल इमरजेंसी के अलावा बाहर निकलना मना
इस क्षेत्र के रहवासियों का घरों से बाहर निकलना पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया गया है। कहा गया है कि केवल मेडिकल इमरजेंसी में ही इस इस प्रतिबंध से छूट दी जाएगी। इसके लिए भी सीएमएचओ से जारी पास की जरूरत होगी।

रायपुर में अभी 156 मरीज
स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक रायपुर जिले में अभी कोरोना के 156 मरीज हैं। इनमें से अधिकांश शहरी क्षेत्र के ही हैं। शनिवार को यहां संक्रमण के 15 नए मामले सामने आए। अब तक रायपुर के 1 लाख 57 हजार 608 लोग संक्रमण की चपेट में आ चुके हैं। इनमें से 3 हजार 136 की जान जा चुकी है। यह प्रदेश के एक जिले में संक्रमण और मौत के सर्वाधिक आंकड़ें हैं।

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