Allegations of disregard for rules in the selection process, the court banned the issuance of appointment letters, chhattisgarh highcourt news | चयन प्रक्रिया में नियमों की अनदेखी का आरोप, कोर्ट ने नियुक्ति पत्र जारी करने पर लगाई रोक; 18 अक्टूबर को होगी अगली सुनवाई

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अब इस मामले की सुनवाई अब 18 अक्टूबर को होगी। - Dainik Bhaskar

अब इस मामले की सुनवाई अब 18 अक्टूबर को होगी।

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सिविल जज परीक्षा 2020 पास करने वाले अभ्यर्थियों की अंतिम सूची को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ता ने CGPSC पर अभ्यर्थियों के चयन प्रक्रिया में नियमों की अनदेखी का आरोप लगाया है। जिसके बाद अब हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने अंतिम सूची में नामजद कुछ कैंडिटेट्स को नियुक्ति पत्र जारी करने पर रोक लगा दिया है। मामले की अगली सुनवाई अब 18 अक्टूबर को होगी।

दरअसल, छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग ने 2020 में सिविल जज के 32 पद पर परीक्षा आयोजित की थी। जिसमें सामान्य वर्ग के लिए 13 पद अरिक्षित थे। सामान्य वर्ग के अंतर्गत आने वाली याचिकाकर्ता खुशबू जैन ने भी इस परीक्षा में भाग लिया था। जिसमें उन्होंने 86 नंबर स्कोर किए थे। इतने ही नंबर कई अन्य अभ्यर्थियों ने भी हासिल किए। लेकिन सबसे अधिक उम्र की होने के बावजूद PSC ने खुशबू को अंतिम सूची के 12वे पद के लिए दो अभ्यर्थियों से नीचे रखा। जिसके बाद PSC के इस फैसले को याचिकाकर्ता ने अपने वकील रोहित शर्मा के जरिए चुनौती दी है।

सबसे अधिक उम्र वाला कैंडिडेट का होता है सिलेक्ट

याचिका पर सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील रोहित शर्मा ने अदालत में दलील दी कि सिविल जज परीक्षा के परिणाम जारी होने के बाद यदि किसी 2 या फिर उससे अधिक अभ्यर्थी बराबर नंबर स्कोर करते हैं, तब नियम अनुसार जिस कैंडिडेट की उम्र सबसे ज्यादा होती है उसका चयन किया जाता है। इस केस में भी याचिकाकर्ता की उम्र सबसे अधिक थी, लेकिन उनका नाम सबसे ऊपर न करके दुसरे उसने छोटी उम्र के 2 अभ्यर्थियों को उनसे ऊपर रखा गया है। ऐसे में योग्य होने के बावजूद उनका चयन नहीं हो पाएगा। इस पूरे मामले पर सुनवाई के बाद हाईकोर्ट के जस्टिस पी. सैम.कोशी ने सिविल जज परीक्षा परिणाम की अंतिम सूची के 12वे पद के लिए किसी भी अभ्यर्थी को नियुक्ति पत्र जारी करने पर रोक लगा दी है।

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