एक साल बाद भी नहीं मिली 80 हजार मजदूरी, मिस्त्री ने थाने में खाया जहर, पुलिस से भी नहीं मिली मदद…

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राजमिस्त्री ने जहर खा कर जान देने की कोशीश की। - Dainik Bhaskar

राजमिस्त्री ने जहर खा कर जान देने की कोशीश की।

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गंज थाने में गुरुवार की शाम करीब 4 बजे राजमिस्त्री ने पुलिस अधिकारियों के सामने जहर खा लिया। पुलिस अफसरों को जैसे ही आभास हुआ कि उसने जहर खाया है, तुरंत वहीं उल्टी करवायी गई। उसके बाद आनन-फानन में उसे अंबेडकर अस्पताल लेकर गए। राजमिस्त्री एक साल से 80 हजार मजदूरी नहीं मिलने से दुखी था। मकान बनवाने वाले ने दो माह पहले अपनी स्कूटी दी, फिर अचानक लूट की शिकायत कर दी।

गंज पुलिस ने राजमिस्त्री को बुलाकर उससे स्कूटी ले ली। मिस्त्री के दोस्त ने गुरुवार को पैसे देने का वादा किया था लेकिन आज वह थाने में पैसे देने से मुकर गया। पुलिस अफसरों ने भी ये कहकर हाथ खड़े कर दिए कि ये उनके थाने का केस नहीं है। इसी से दुखी होकर राजमिस्त्री ने जहर खा लिया। अंबेडकर अस्पताल में देर रात तक उसे होश नहीं आया था।

गंज थाने का स्टाफ अब इस पूरे मामले से खुद को अलग करने की कोशिश में जुटा है। थाने के आला अफसर कुछ भी नहीं बोल रहे हैं, जबकि राजमिस्त्री देवेंद्र नारायण वर्मा कई बार चक्कर काट चुका है। गंज पुलिस के अफसरों ने ही उससे स्कूटी लेकर मकान बनवाने वाले मोहनलाल साहू को दी थी।

मोहन लाल ने पुलिस अफसरों के सामने कहा था कि वह आज यानी गुरुवार को देंवेंद्र के पैसे दे देगा। देवेंद्र वही पैसे लेने पहुंचा था। थाने में मोहनलाल साहू ने कह दिया कि वह अभी पैसे नहीं दे सकता। थाने में उन्हें समझौते के लिए बुलवाने वाले अफसरों ने भी हाथ खड़े कर दिए। उन्होंने कहा कि यह पूरा मामला उनके थाने का ही नहीं है, इसलिए वे कुछ नहीं कर सकते। ये सुनकर ही देवेंद्र ने जहर खाया।

पुलिस ने मदद से किया इंकार, कहा- उनके इलाके का केस नहीं
अंबेडकर अस्पताल में देवेंद्र के भतीजे ने बताया कि उसके चाचा काफी परेशान थे। मोहनलाल के परिवार वालों ने ही उसे स्कूटी दी थी। इसके बावजूद मोहनलाल ने झूठी शिकायत कर दी। पुलिस ने थाने बुलवाया लेकिन वहां पुलिस के अधिकारी मोहनलाल का ही पक्ष ले रहे थे। उन्होंने स्कूटी दिलवाते समय देवेंद्र यानी उसके चाचा पर दबाव डाला, लेकिन आज जब वे अपने पैसे के लिए गए तो पुलिस वालों ने कह दिया कि वे इसमें कुछ नहीं कर सकते। न तो मकान उनके इलाके में बना है और न ही किसी तरह का लेन-देन हुआ है। भतीजे के अनुसार उसी समय उसके चाचा ने कहा कि जब मुझसे स्कूटी लेना था, तब पूरा मामला आपके थाने का था, अब मेरे पैसे दिलाना आपके अधिकार क्षेत्र से बाहर हो गया है।

आर्थिक और मानसिक रूप से था परेशान
कबीर नगर निवासी राजमिस्त्री देवेंद्र नारायण वर्मा और मोहनलाल साहू आपस में दोस्त हैं। देवेंद्र राज मिस्त्री का काम करता है। उसने करीब एक साल पहले मोहनलाल का घर बनाया था। उसे अभी तक उसकी मजदूरी के पैसे नहीं मिले थे। उसी पैसे के लेन-देन को लेकर दोनों के बीच कई दिनों से विवाद चल रहा था। मजदूरी की रकम नहीं मिलने की वजह से वह आर्थिक और मानसिक रूप से परेशान भी रहने लगा था।

वह मोहनलाल पर काफी दबाव डाल रहा था। करीब दो माह पहले मोहन की बेटी ने अपनी स्कूटी देवेंद्र को दे दी। उससे कहा कि जब पैसे देंगे तब स्कूटी लौटा देना। करीब एक हफ्ता पहले मोहनलाल ने गंज थाने में लूट की शिकायत कर दी। उसने पुलिस में शिकायत की थी कि देवेंद्र ने फाफाडीह के पास उससे स्कूटी छीन ली है। पुलिस ने शिकायत के आधार पर देवेंद्र को बुलवाया। उसने जब बताया कि उसे मजदूरी के पैसे नहीं मिले हैं, तब भी पुलिस ने उसका पक्ष नहीं लिया और उल्टे गाड़ी लौटाने के लिए दबाव डाला।

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