तीसरी लहर के लिए रायपुर को डीआरडीओ से 300 ऑक्सीजन सिलेंडर, राज्य से 8.5 करोड़ रुपए…

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रायपुर सीएमओ कार्यालय में डीआरडीओ में बने ऑक्सीजन सिलेंडर की खेप पहुंची। - Dainik Bhaskar

रायपुर सीएमओ कार्यालय में डीआरडीओ में बने ऑक्सीजन सिलेंडर की खेप पहुंची।

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  • प्रदेश में कोरोना से निपटने 300 करोड़ के खर्च का अनुमान, अलग फंड मिलेगा

कोरोना संक्रमण के मामले में छत्तीसगढ़ अभी काफी सुरक्षित है, लेकिन तीसरी लहर के हिसाब से मदद मिलनी शुरू हो गई है। पीएम केयर फंड से सबसे पहले भारतीय रक्षा अनुसंधान (डीआरडीओ) में तैयार किए गए 300 से अधिक ऑक्सीजन सिलेंडर रायपुर को मिल गए हैं। यही नहीं, प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग से रायपुर को तीसरी लहर के निपटने के लिए 8.5 करोड़ रुपए का फंड मंजूर हुआ है।

जिले से एक्शन प्लान भी मांगा गया है कि यह रकम किस तरह खर्च की जाए, ताकि कोरोना के इलाज से जुड़े संसाधन जुटाए जा सकें। प्रदेश में तीसरी लहर से मुकाबले का एक्शन प्लान और रणनीति तैयार हो गई है। स्वास्थ्य विभाग ने सभी जिलों से बिंदुवार जरूरतें और प्लान मांगा था। अब इस हिसाब से फंड का आवंटन शुरू कर दिया गया है। मिली जानकारी के मुताबिक प्रदेश में तीसरी लहर की तैयारी के लिए आरंभिक रूप से करीब 300 करोड़ रुपए के खर्च का अनुमान लगाया है।

यह रकम जिलों को इलाज के लिए संसाधन जुटाने में मददगार होगी। कॉरपोरेट सेक्टर से भी मदद के लिए जो संसाधन मिल रहे हैं, वह अलग से जिलों में भेजे जाएंगे। चूंकि रायपुर प्रदेश में इलाज का केंद्र है इसलिए यहीं सबसे पहले मदद पहुंची है। प्रदेश में तीसरी लहर के मद्देनजर 100 से अधिक ऑक्सीजन प्लांट बनाने का काम भी 80 फीसदी से अधिक पूरा हो चुका है।

प्रदेश के 28 जिलों में 13203 से अधिक अतिरिक्त बिस्तरों की व्यवस्था बनाई जा रही है, जिसमें से 6589 से अधिक बेड ऑक्सीजन वाले होंगे। इसके अलावा दूसरी लहर के अंत तक 32 हजार बेड का इंतजाम किया जा चुका था, जिसमें नए बेड और जुड़ेंगे।

  • 918 से अधिक अतिरिक्त वेंटिलेटर लगे हैं जिलों में।
  • 350 वेंटिलेटर की व्यवस्था बच्चों के लिए की जा रही है।

जब जैसी जरूरत मिलेगा फंड
कोरोना कोर कमेटी के असेसमेंट के मुताबिक प्रदेश में अगर कोरोना के केस बढ़ते भी हैं, तो दवाइयों वगैरह का बंदोबस्त नवंबर तक के लिए है। एंटीजन जांच हर जगह हो सके, इसके लिए पर्याप्त किट की व्यवस्था भी हो रही है। तीसरी लहर के पहले ही हेल्थ वर्करों को गांव गांव में टेस्ट करने की ट्रेनिंग दी जा रही है। जिला अस्पतालों और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में एंटीजन, आरटीपीसीआर और ट्रूनेट तीनों तरह के टेस्ट की व्यवस्था रहेगी।

बजट की कमी नहीं

  • तीसरी लहर की चुनौती से निपटने के लिए जिलों में फंड या बजट की कमी नहीं होगी। जरूरत के हिसाब से हर जिले को पर्याप्त मात्रा में बजट और संसाधन मिल सकें, इसका बंदोबस्त किया गया है। – डॉ. सुभाष मिश्रा, डायरेक्टर, एपिडेमिक कंट्रोल

प्लान तैयार कर रहे

  • रायपुर को साढ़े 8 करोड़ रुपए मिले हैं। इसके अनुरूप प्लान तैयार कर रहे हैं। ग्रामीण स्तर पर भी मरीजों को टेस्ट, इलाज और दवाएं मिल सकें इसके लिए पर्याप्त बंदोबस्त किया जा रहा है। – डॉ. मीरा बघेल,सीएमओ, रायपुर

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